अनूलोम-विलोम प्राणायाम anulom-vilom pranayam

  યોગ-પ્રાણાયામ

    https://youtu.be/QzVBltWhk2M

         

Yoga by Pragnesh,

#healthyogaxpragnesh,
#અનુલોમ-વિલોમ પ્રાણાયામ
                                  #swamiramdev yoga
#healthyogaxpragnesh 


" करो योग, रहो निरोग "     योग और प्राणायाम से जुडकर हम अपने आप को आध्यात्मिक, शारिरीक और मानसिक शांति व स्वस्थ-तंदुरूस्त जीवन निर्वाह कर सकते हैं। मनुष्य जीवन में जिस तरह कार्य, दिन चर्या, प्राण-वायु, आहार-विहार का महत्व है। उसी प्रकार हमारे इस अनमोल मनुष्य जीवन में योग-प्राणायाम का भी विशेष महत्व है। ,,,,,नमस्कार ॐ  ।      मैं प्रज्ञेष राठोड आज हम यहा अनुलोम-विलोम प्राणायाम जान कर समजेगे वह स्रोत अपने जीवन में शामिल करके लाभ पाकर निरोगी जीवन निर्वाह कर सकते हैं। 
- अनुलोम-विलोम प्राणायाम :-
           ॐ, तीन आसनोमें सिध्धासन, वज्रासन और पद्मासन में से किसी एक आसन में बैठें। शुरुआत और अन्त हमेशां बाँये नथुने (नोस्टिरल) से ही करनी है, नाक का दाँया नथुना बंद करें व बाँये से लंबी साँस लें, फिर बाँये को बंद करके, दाँये वाले से लंबी साँस छोडे़ं...अब दाँये से लंबी साँस लें और बाँयें वाले से छोडे़ं...यानि यह दाँया-दाँया बाँया-बाँया यह क्रम रखना, यह प्रक्रिया १०-१५ मिनट तक दुहराएं| साँस लेते समय अपना ध्यान दोंनों आँखों के बीच में स्थित आज्ञा चक्र पर ध्यान एकत्रित करना चाहिए। और मन ही मन में साँस लेते समय ॐ-ॐ का जाप करते रहना चाहिए। हमारे शरीर की ७२,७२,१०,२१० सुक्ष्मादी सूक्ष्म नाड़ी शुद्ध हो जाती हैं। बाँयी नाड़ी को चन्द्र (इडा, गन्गा) नाडी, और दायीं नाडी को सूर्य (पीन्गला, यमुना) नाड़ी कहते हैं। चन्द्र नाडी से ठण्डी हवा अन्दर जाती है और सूर्य नाड़ी से गरम हवा अन्दर जाती है। ठण्डी और गरम हवा के उपयोग से हमारे शरीर का तापमान संतुलित रहता है। इससे हमारी रोग-प्रतिकारक शक्ति बढ़ जाती है।
*लाभ :-

हमारे शरीर की ७२,७२,१०,२१० सुक्ष्मादी सूक्ष्म नाड़ी शुद्ध हो जाती है।


हार्ट की ब्लाॅकेज खुल जाते है।


हाई, लो दोंनों रक्त चाप ठीक हो जायेंगे|


आर्थराटिस, रह्यूमेटोइड आर्थराइटिस, कार्टीलेज घिसना जैसी बीमारियाँ ठीक हो जाती है।


टेढे़ लिगामेंट्स सीधे हो जायेंगे|


वैरीकोस वेन्स ठीक हो जाती हैं।


कोलेस्ट्रोल , टाँक्सिन्स, आँक्सीडैन्ट्स जैसे विजातीय पदार्थ शरीर के बाहर निकल जाते हैं।


सायकिक पेंशेन्ट्स को फायदा होता है।


किडनी प्राकृतिक रूप से स्वच्छ होती है, डायलेसिस करने की जरुरत नहीं पड़ती|


सबसे बड़ा खतरनाक कैन्सर तक ठीक हो जाता है।


सभी प्रकार की ऐलर्जीयाँ मिट जाती है।


मेमरी बढ़ाने के लिये।


सर्दी, खाँसी, नाक, गला ठीक हो जाता है।


ब्रेन ट्यूमर भी ठीक हो जाता है।


सभी प्रकार के चर्म समस्या मिट जाती है।


मस्तिषक के सम्बधित सभी व्याधिओं को मिटाने के लिये।


पार्किनसन्स, पैरालिसिस, लूलापन इत्यादि स्नायुओं से सम्बधित सभी व्याधिओं को मिटाने के लिये।


सायनस की व्याधि मिट जाती है।


डायबीटीज़ पूरी तरह मिट जाती है।


टाँन्सिल्स की व्याधि मिट जाती है।
            

धन्यवाद, 
क्रिपया सेर करो, लाईक करे,,,,,,,,,,,,,

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